विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस : संघर्षों से ही मिलती है जीवन में सफलता

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस : संघर्षों से ही मिलती है जीवन में सफलता

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विशेष – 10 सितंबर 2022

आत्महत्या कभी भी किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता। जीवन बहुत अनमोल है, दुनिया भर की दौलत लूटाकर भी हम एक पल का जीवन खरीद नहीं सकते हैं। ज़िंदगी का मोल उससे पूछो जिनके पास चन्द लम्हों का जीवन बचा हो और वो खूब जीना चाहते हैं। ज़िंदगी जिंदादिली का नाम है, और आत्महत्या कायरता और बुजदिली का नाम है। हमारी ज़िंदगी दूसरों की देन है, इसे खत्म करने का हक़ हमे नहीं है। विश्व के सभी प्रकार के प्राणियों में मनुष्य ही एक ऐसा सामाजिक प्राणी है जो अन्य प्राणियों के मुकाबले शारीरिक और मानसिक तौर मजबूत होकर भी आत्महत्या जैसा गलत कदम उठाता है। समय लगातार परिवर्तनशील है, वो कभी भी एक सा नहीं रह सकता, समय बलवान है, यह हर चीज सीखा देता है, वक्त अच्छा हो या बुरा, बदलेगा जरूर।

बहुत बार बुरे वक्त के लिए मनुष्य खुद जिम्मेदार होता है जैसे – गलत काम, नियमों की अवहेलना, असभ्य व्यवहार, संस्कारों से दूरी, अपराध, भावनाओं में बह जाना, बिना सोचे-समझे निर्णय लेना, दूसरों पर निर्भरता या जरुरत से ज्यादा विश्वास, लापरवाही, लत, नशाखोरी, गलत संगत, दिखावा, लालच, सहनशीलता और संतोष की कमी, नकारात्मक विचार या खुद को कमजोर समझना, गुस्सैल स्वभाव व अन्य अनेक बातें हमें तकलीफदेह परिस्थिति में डाल देती है।

ज़िंदगी में एक बात कभी मत भूलना कि गुस्से और ख़ुशी में भावनाओं में बहकर कभी भी कोई निर्णय या वादा ना करें।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस कब मनाया जाता है?

दुनिया भर में हर साल 10 सितम्बर “विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस” (World suicide prevention day in Hindi) के रूप में मनाया जाता है, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में आत्महत्या की रोकथाम के बारे में जागरुकता बढ़ाना है।

एक वर्ष में साधारणतः 703,000 लोग समस्याओं से घबराकर या निराशा में आत्महत्या करते हैं। प्रत्येक आत्महत्या के पीछे, आत्महत्या का प्रयास करने वाले 20 अन्य लोगों के होने की संभावना है।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2022 की थीम

इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम, “कार्रवाई के माध्यम से आशा जगाना”, यह है। हम सभी लोग अपने-अपने स्तर पर, एक परिवार के सदस्य, मित्र, सहकर्मी, आस-पड़ोसी, व्यावसायिक, अधिकारी, सामाजिक राजनीतिक नेता और सरकार के तौर पर आत्महत्या को रोकने के लिए कार्रवाई कर सकते हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट अनुसार 2021 में, देश  में 1,64,033 आत्महत्या के मामले देखे गए।

विश्व में खेल, सिनेमा, व्यापार, विज्ञान, शिक्षा ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर दिव्यांग व्यक्तियों ने अपने कला का लोहा न मनवाया हो।

स्टीफन हॉकिंग दिव्यांग होकर भी दुनिया के सबसे प्रसिद्ध विद्वान वैज्ञानिकों में से एक थे। कमी ढूंढने से मिलती है, लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते हैं, उन्हें हर चीज अपने कदमों तले नजर आती है।

कामयाब होने के लिए इंसान को सकारात्मक सोच और मजबूत इरादों की जरुरत होती है। संघर्ष जीवन का हिस्सा है, बस किसी का संघर्ष कम या अधिक होता है, इसके बगैर जीवन का मोल हमें समझ नहीं आता। गलत रास्ते पर चलने के लिए डर कर जीना होता है, लेकिन जो सच्चाई के मार्ग पर होता है वो हर दम निडर और भयमुक्त जीवन जीता है।

माना कि आजकल हर ओर समस्याओं का अंबार नजर आता है, परन्तु लोग जो गलती करें, जरूरी नहीं कि हम भी वही गलती दोहराएं। काम छोटा हो या बड़ा अगर काम ईमानदारी का है तो लोकलाज का विचार मन में कभी न लाएं।

इतिहास संघर्षमय गाथाओं से भरा पड़ा है, इतिहास उन्हें ही याद रखता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहकर लक्ष प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहे।

छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गांधी आजादी के लिए जान न्योछावर करने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह, स्वतंत्रता सैनिक, समाज की बुराई से लड़ने वाले डॉ. बी. आर. आंबेडकर, नारी शक्ति के लिए शिक्षा की ज्योत जलानेवाली सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले, समाज में फैली कुरीतियों से लड़ने वाले समाज सुधारक संत, महात्मा, महापुरुष कभी किसी मुश्किलों से घबरायें नहीं, अपने लक्ष्य पर डटे रहे और सामाजिक परिवर्तन लाकर इतिहास रचा।

एक अति सामान्य ग्रामीण व्यक्ति दशरथ मांझी ने अकेले पहाड़ खोदकर लोगों के लिए रास्ता बनाया और दुनिया के सामने मिसाल पेश की। जब एक व्यक्ति अपनी जान लेता है तब वह अपने साथ परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, सग्गे-सम्बंधी, आस-पड़ोस, समाज को भी कमजोर कर समस्याएं छोड़ जाता है। आज भी देश के जवान कड़कड़ाती धूप, बारिश, ठंड और बर्फीले मौसम में अपनी जान की परवाह किये बगैर देश की सुरक्षा में सर्वदा तत्पर रहते हैं, मौत सामने होकर भी अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते हैं। जवान शहीद होकर भी हमारे दिलों में जिन्दा रहते हैं।

समस्या किसे नहीं होती, दुनिया भर में हर साल बाढ़, तूफान, अकाल, भूस्खलन, भूकंप व अन्य नैसर्गिक आपदाएं करोड़ों लोगों की ज़िंदगी प्रभावित करती है। लाखों लोग सड़क पर ज़िंदगी गुजारते हैं, करोड़ों लोग भूख और आधारभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। कोई अनाथ है, तो कोई बीमार है, सबकी अपनी-अपनी समस्याएं हैं। हमसे भी ज्यादा लोग परेशानियों का सामना कर रहे हे। लोगों की दास्तानें सुनेंगे तो आप अपना गम भी भूल जायेंगे, ऐसा लोगों का संघर्ष है।

ज़िंदगी में कभी भी निराशा से घिरकर उम्मीद का दामन ना छोड़ें, हमेशा सकारात्मक विचार और अपनी मेहनत, काबिलियत पर भरोसा करें। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, इसलिए एक बात हमेशा ध्यान में रखिए कि मन से कभी हारना नहीं है। जितना संभव हो निस्वार्थता से परोपकार की भावना बनाए रखें। बुरी आदतों से दूर रहें, हमेशा सकारात्मक विचारों वाले लोगों के साथ रहें, प्रकृति और पशु-पक्षी से जुड़ाव बनाये रखें, क्योंकि यह मानसिक शांति को बनाये रखने में मदद करते हैं। संस्कारशील व्यवहार और हमेशा बड़ों का सम्मान होना ही चाहिए। स्वास्थ्यकर खाना और शारीरिक खेल खेलें, यह शरीर और मन को स्फूर्ति और तनावमुक्त रखने में सहयोगी है। हमेशा खुश रहें, समस्याओं से डरे नहीं बल्कि उनसे लड़े, चुनौतियों को स्वीकार करें और हमेशा आगे बढ़ते रहें।

डॉ. प्रितम भि. गेडाम

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